






All aspects of Krishna's life
श्लोक:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
हिंदी अनुवाद:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं।
इसलिए तुम कर्मों के फल का कारण मत बनो और न ही कर्म न करने में आसक्त हो।
श्रीमद्भगवद्गीता का परिचय
श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म का एक महान और दिव्य ग्रंथ है। यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है और भगवान श्रीकृष्ण तथा अर्जुन के बीच हुए दिव्य संवाद पर आधारित है।
भगवद्गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। प्रत्येक अध्याय जीवन के एक महत्वपूर्ण विषय—जैसे कर्म, ज्ञान, भक्ति, योग, आत्मा, धर्म और मोक्ष—का गहन मार्गदर्शन करता है।
गीता के 18 अध्यायों को सामान्यतः तीन प्रमुख भागों में समझा जाता है:
- कर्म योग (अध्याय 1–6) – कर्तव्य, कर्म और आत्म-अनुशासन का मार्ग।
- भक्ति योग (अध्याय 7–12) – ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का मार्ग।
- ज्ञान योग (अध्याय 13–18) – आत्मा, प्रकृति, परमात्मा और मोक्ष का ज्ञान।
भगवद्गीता का प्रत्येक अध्याय जीवन को सही दिशा देने, मानसिक शांति प्राप्त करने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कालजयी मार्गदर्शिका है।